CPI नेताओं ने गोरक्षा को बताया जरूरी मुद्दा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के मुख्यालय, अजय भवन पहुंचे और देश में गोरक्षा कानून लागू करने के अपने प्रस्ताव पर जवाब मांगा। इस मुलाकात के दौरान CPI नेताओं ने भी गोरक्षा को एक महत्वपूर्ण विषय बताया।
ई-मेल की गलती से नहीं मिला पत्र
ज्योतिर्मठ शंकराचार्य ने बताया कि CPI नेताओं ने स्पष्ट किया कि ई-मेल आईडी में गलती के कारण उन्हें पहले कोई पत्र नहीं मिला था। अब जब उन्हें पत्र प्राप्त हो गया है, तो इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने CPI सचिव पल्लव सेन गुप्ता से इस मुद्दे पर चर्चा की।
CPI प्रमुख के साथ चर्चा के बाद आएगा जवाब
शंकराचार्य ने कहा, “CPI के नेताओं ने बताया कि यह पत्र पार्टी प्रमुख डी राजा को भेजा जाएगा और अन्य सदस्यों के साथ चर्चा के बाद वे मुझे जवाब देंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि वे जल्द ही कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यालयों में भी जाएंगे।
गोरक्षा कानून की मांग पर शंकराचार्य का बयान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पहले 15 मार्च को कहा था कि उन्होंने महाकुंभ के दौरान सरकार से गोरक्षा विधेयक लागू करने की अपील की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के आंकड़े हमेशा गोरक्षा के वादों के विपरीत क्यों होते हैं।

राजनीतिक दलों से समर्थन मांगने निकले थे स्वामी
शंकराचार्य ने बताया कि वे 17 मार्च को विभिन्न राजनीतिक दलों के दफ्तरों में जाकर इस विषय पर उनकी राय जानने वाले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में गोरक्षा की बात करने से लोगों को रोका जाता है।
पुलिस ने CPI ऑफिस जाने से रोका
जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद CPI कार्यालय की ओर जा रहे थे, तब दिल्ली पुलिस ने उन्हें नरेला स्थित CPI दफ्तर जाने से रोक दिया। पुलिस ने सड़क अवरुद्ध कर दी, जिससे नाराज शंकराचार्य ने कहा, “इस देश में गोरक्षा की बात करने नहीं दी जाती, यदि कोई ऐसा करता है तो उसे रोक दिया जाता है।”
पुलिस के रवैये पर जताई नाराजगी
शंकराचार्य ने पुलिस के इस रवैये पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “रास्ता पुलिस के ट्रक से बंद कर दिया गया है, हम लगातार अनुरोध कर रहे हैं लेकिन हमें आगे नहीं जाने दिया जा रहा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि गोरक्षा के लिए उनकी आवाज उठती रहेगी।
















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