AIMPLB के प्रदर्शन में सियासी दलों का समर्थन, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन की अगुवाई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने की, जिसमें कई मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी भी शामिल हुए।
ओवैसी का मोदी सरकार पर हमला: ‘मस्जिद-मजार छीनने की साजिश’
प्रदर्शन के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह बिल मुस्लिमों से उनकी संपत्तियां छीनने की साजिश है। उन्होंने कहा,
“मोदी सरकार अमन-चैन खत्म करना चाहती है। मंदिर-मस्जिद के नाम पर लोगों को लड़ाया जा रहा है। दिल्ली में 123 वक्फ बोर्ड की संपत्तियां हैं, जिन्हें सरकार अपनी बताती है। अगर यह बिल पास हो गया तो कोई भी वहां बोर्ड लगाकर कह सकता है कि यह वक्फ की संपत्ति नहीं है।”
उन्होंने चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान से अपील की कि वे इस बिल का समर्थन न करें।
महमूद मदनी की चेतावनी: ‘अब संविधान पर बुलडोजर चलाने की कोशिश’

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने इस बिल को संविधान पर हमला करार दिया। उन्होंने कहा,
“पहले हमारे घरों पर बुलडोजर चला, अब संविधान पर चलाने की कोशिश हो रही है। यह सिर्फ मुस्लिमों का मामला नहीं है, बल्कि देश के संविधान का मामला है। हमें हर हाल में इस बिल की मुखालफत करनी होगी।”
उन्होंने इशारा किया कि यह लड़ाई अब सिर्फ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन से नहीं लड़ी जाएगी, बल्कि इसके लिए और भी कड़े कदम उठाने होंगे।
AIMPLB के विरोध को सियासी दलों का समर्थन
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुसलमानों से जंतर-मंतर पर पहुंचने की अपील की थी। इस प्रदर्शन को कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, जेएमएम, एनसीपी, एसपी, एआईएमआईएम, डीएमके, एसएडी, शिवसेना (यूबीटी) और आईयूएमएल जैसी पार्टियों का समर्थन मिला।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह बिल मुस्लिमों की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को खत्म करने की साजिश है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।














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