मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की अटकलें तेज
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यह बदलाव 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किए जाएंगे, ताकि बीजेपी अपनी सियासी मजबूती बनाए रख सके।
योगी सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस तरह, छह मंत्री पद खाली हैं, जिन्हें जल्द भरा जा सकता है। जितिन प्रसाद के लोकसभा सांसद बनने के बाद उनके इस्तीफे से एक सीट खाली हुई थी। ऐसे में नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, हाल ही में योगी सरकार ने मंत्रियों के कार्य और उनकी जमीनी पकड़ की समीक्षा की थी, जिसके आधार पर भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

बीजेपी के संगठन में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की जगह नए अध्यक्ष की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। इसके साथ ही जिला और मंडल स्तर पर संगठन में फेरबदल किया जाएगा। संगठन में पिछड़ा, दलित और अन्य वर्गों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देकर समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) समीकरण को काउंटर करने की रणनीति बनाई जा रही है। बीजेपी यादव समुदाय के नेताओं को भी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।
2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद बीजेपी अपनी सियासी रणनीति को नए सिरे से गढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कहा है कि उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी इस चुनाव में 80 फीसदी वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि 2027 में सत्ता की हैट्रिक बनाई जा सके।
होली के बाद यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर संगठनात्मक फेरबदल तक, हर कदम 2027 के चुनाव की सियासी जमीन तैयार करने की दिशा में बढ़ाया जाएगा।














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