बीजेपी ने फिर उठाई ‘लक्ष्मीनगर’ बनाने की मांग, सियासी हलचल तेज
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर करने की मांग एक बार फिर से जोर पकड़ रही है। बीजेपी एमएलसी मोहित बेनीवाल ने विधान परिषद में इस मुद्दे को उठाया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपनी मांग दोहराई। अब जिला पंचायत अध्यक्ष भी 12 मार्च को बोर्ड बैठक में इस पर प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। सवाल उठता है कि 42 साल पुराने इस मुद्दे को उठाकर बीजेपी 2027 के चुनाव के लिए माहौल बनाने की कोशिश कर रही है?
मुजफ्फरनगर: सियासत का नया केंद्र?
2013 में जाट-मुस्लिम दंगों के बाद पश्चिमी यूपी में बीजेपी के लिए सियासी जमीन तैयार हुई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जबरदस्त जीत दर्ज की और 2017 के विधानसभा चुनाव में कैराना पलायन का मुद्दा उठाकर सत्ता में वापसी की। अब मुजफ्फरनगर का नाम बदलने का मुद्दा उठाकर बीजेपी एक बार फिर से पश्चिमी यूपी की सियासी नब्ज टटोल रही है।
क्या मुजफ्फरनगर बनेगा लक्ष्मीनगर?

बीजेपी एमएलसी मोहित बेनीवाल ने विधान परिषद में कहा कि साधु-संत लंबे समय से मुजफ्फरनगर का नाम बदलने की मांग कर रहे हैं। यह हमारी संस्कृति और गौरव से जुड़ा मुद्दा है और ‘लक्ष्मीनगर’ नाम आर्थिक समृद्धि का प्रतीक बनेगा। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से लखनऊ में मुलाकात कर अपनी मांग को दोहराया।
जिला पंचायत अध्यक्ष वीरपाल निर्वाल भी इस मुद्दे के समर्थन में हैं और 12 मार्च को होने वाली बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पेश करेंगे। अगर प्रस्ताव पास होता है तो इसे शासन को भेजा जाएगा।
मुजफ्फरनगर का नाम कैसे पड़ा?
मुजफ्फरनगर का नाम शाहजहां के शासनकाल में पड़ा था। 1633 में शाहजहां के एक प्रमुख सरदार सैय्यद मुजफ्फर खान को सरवट जागीर मिली थी। उनके बेटे मुन्नवर लश्कर खान ने अपने पिता की याद में इस शहर का नाम मुजफ्फरनगर रखा था। ब्रिटिश काल में इसे जिला घोषित किया गया और तब से यह नाम प्रचलित है।
आरएसएस की पुरानी मांग, फिर सियासी बहस में क्यों?
1980 के दशक में आरएसएस ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर का नाम बदलने की मांग उठाई थी। 1983 में हिंदू सम्मेलन के दौरान पहली बार लक्ष्मीनगर नाम की चर्चा हुई थी। इसके बाद संघ ने नाम बदलने के लिए अभियान भी चलाया। शहर में पोस्टर-बैनर, पत्राचार और पोस्टकार्ड पर लक्ष्मीनगर लिखा जाने लगा।
अब 42 साल बाद, बीजेपी इस मुद्दे को फिर से हवा दे रही है और इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सियासी रणनीति का हिस्सा बना रही है।
2027 के चुनावी समीकरण और बीजेपी की रणनीति
विधान परिषद में यह मुद्दा उठाकर बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए हिंदुत्व का एजेंडा सेट करने की कोशिश शुरू कर दी है। 2022 और 2024 के चुनावों में पश्चिम यूपी में बीजेपी को झटका लगा था। मुजफ्फरनगर, कैराना और सहारनपुर सीटें हाथ से निकल गईं, जबकि मेरठ में मामूली अंतर से जीत मिली।
अब बीजेपी फिर से अपने पुराने वोटबैंक को मजबूत करने की रणनीति बना रही है। कैराना पलायन के मुद्दे के बाद अब मुजफ्फरनगर का नाम बदलने का मुद्दा उठाकर बीजेपी पश्चिमी यूपी में सियासी समीकरण साधने की तैयारी कर रही है।
क्या नाम बदलने से बदलेगा चुनावी गणित?
पिछले साल केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी जिले का नाम बदलने की बात कही थी। अब बीजेपी एमएलसी ने इस मुद्दे को फिर से उठाकर चुनावी एजेंडा सेट करने की कोशिश की है। अगर जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होता है, तो यह पश्चिमी यूपी की सियासत में नया मोड़ ला सकता है।
अब देखना होगा कि बीजेपी इस मुद्दे के जरिए पश्चिमी यूपी के राजनीतिक समीकरण को कितना बदल पाती है। क्या मुजफ्फरनगर सच में लक्ष्मीनगर बनेगा या यह सिर्फ सियासी रणनीति तक ही सीमित रहेगा?















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