America सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय क्रू सदस्यों की जान गई, बढ़ा विवाद
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सटे ओमान तट के पास America सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय क्रू सदस्यों की जान जाने के बाद भारत में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस घटना को लेकर भारत सरकार ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है और 24 घंटे के भीतर दो बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया है।
इसी बीच प्रसिद्ध भू-राजनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने सवाल उठाया है कि यदि इस हमले में भारतीयों की जगह चीनी नागरिक मारे गए होते, तो क्या दुनिया की प्रतिक्रिया और चीन का रवैया ऐसा ही होता?
America: ब्रह्मा चेलानी का दावा- चीन ऐसी घटना को वैश्विक संकट में बदल देता
ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत ने इस घटना पर सामान्य कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है, जबकि चीन ऐसी किसी भी घटना को अमेरिका की ओर से सीधे और घातक उकसावे के रूप में देखता।
उन्होंने कहा कि अगर चीनी नाविक मारे गए होते, तो बीजिंग इस मामले को बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल देता। चीन केवल सार्वजनिक निंदा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अमेरिकी रक्षा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने, सैन्य संवाद रोकने और अमेरिका के साथ राजनयिक संबंधों को प्रभावित करने जैसे कदम भी उठा सकता था।
America: ओमान तट के पास क्या हुआ था?
9-10 जून को अमेरिकी नेवी ने ओमान के तट के पास मौजूद MT Settebello नामक ऑयल टैंकर पर सैन्य ऑपरेशन चलाया था। जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे।
घटना के बाद 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन तीन नाविक लापता हो गए थे। बाद में भारत सरकार ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की।
America: जान गंवाने वाले भारतीय समुद्री कर्मी कौन थे?
इस घटना में जान गंवाने वाले भारतीय समुद्री कर्मियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
* डेक कैडेट आदित्य शर्मा
* इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया
* चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश
इनकी मृत्यु के बाद देशभर में शोक और आक्रोश का माहौल है।
America: 1999 के बेलग्रेड हमले का उदाहरण देकर समझाई प्रतिक्रिया
चेलानी ने अपने तर्क के समर्थन में 1999 की एक घटना का उल्लेख किया। उस समय यूगोस्लाविया में चीनी दूतावास पर अमेरिकी मिसाइल अटैक हुआ था, जिसमें तीन चीनी पत्रकारों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद चीन में बड़े पैमाने पर अमेरिका विरोधी प्रदर्शन हुए थे। बीजिंग स्थित अमेरिकी दूतावास पर पथराव हुआ और दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर बातचीत ठप पड़ गई थी।
भारतीय मर्चेंट नेवी कर्मियों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के हजारों युवा मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर सेवाएं देते हैं।
ऐसे में सरकार को केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भारतीय मर्चेंट नेवी कर्मियों की सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और बीमा व्यवस्था को भी मजबूत बनाना चाहिए।
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने जताई कड़ी आपत्ति
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सवाल किया कि अमेरिका की कार्रवाई को ‘नॉन-कम्प्लायंस’ जैसे शब्दों के जरिए परोक्ष रूप से सही क्यों ठहराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि चाहे जहाज पर भारतीय झंडा न लगा हो, लेकिन भारतीय नागरिकों की जान गई है और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर से अब तक कोई खेद तक व्यक्त नहीं किया गया।
सिब्बल ने कहा कि जब भारत और अमेरिका हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर सहयोग करते हैं और संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करते हैं, तब अमेरिका भारतीय नाविकों के निधन के मामले को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
America: भारत ने अब तक क्या कदम उठाए?
तीन भारतीय नाविकों के निधन के बाद भारत सरकार ने कड़े कूटनीतिक कदम उठाए हैं।
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के चार्ज डी’एफेयर्स जेसन मीक्स को दो बार तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बेहद चिंताजनक हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।
भारत ने सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के जरिए शांति बहाल करने की अपील की है। साथ ही समुद्री मार्गों पर निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने राहत एवं बचाव कार्यों में निभाई भूमिका
शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि भारतीय समुद्री कर्मियों की मृत्यु देश के लिए बड़ी क्षति है।
वहीं ओमान में भारतीय दूतावास ने स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों में सहयोग किया। सरकार ने कहा है कि विदेशों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।















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