Avimukteshwaranand News: उत्तर प्रदेश में दर्ज यौन उत्पीड़न प्रकरण में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को फिलहाल राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की सख्त कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले में अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना उचित प्रक्रिया नहीं है और इसके लिए निचली अदालत में जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों का हवाला भी दिया।
वहीं शंकराचार्य की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि शिकायत एक संरक्षक के माध्यम से दर्ज कराई गई है, जबकि बच्चों के माता-पिता या अभिभावकों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। बचाव पक्ष ने इसे संदिग्ध बताते हुए कहा कि पूरा मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया प्रतीत होता है।
अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता का आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। साथ ही सवाल उठाया गया कि बच्चों को अब तक बाल कल्याण समिति के समक्ष क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया। इस पर कोर्ट ने सरकार से बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी।

जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि बच्चों का मेडिकल परीक्षण काफी देरी से कराया गया और प्रस्तुत दस्तावेजों में भी असंगतियां हैं। सरकार ने जवाब में बताया कि बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।
सुनवाई से पहले शंकराचार्य ने भरोसा जताया कि अदालत में सच्चाई सामने आएगी और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और तथ्यों के आधार पर ही फैसला होना चाहिए।
गौरतलब है कि नाबालिगों से कथित यौन शोषण के आरोप में दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए शंकराचार्य और उनके शिष्य ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की है, जिस पर अदालत में सुनवाई जारी है।














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