MSP Guarantee Law: भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने केंद्रीय बजट को लेकर असंतोष जाहिर किया है। उनका कहना है कि किसानों को इस बार सरकार से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट में उनकी अहम मांगों को प्राथमिकता नहीं दी गई। टिकैत के मुताबिक, यह बजट भले ही दस्तावेजों में प्रभावशाली नजर आए, लेकिन किसानों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में नाकाम साबित हुआ है।
उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों की कुछ चुनिंदा फसलों का जिक्र किए जाने पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि अखरोट और चंदन जैसी फसलों के नाम तो लिए गए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इससे इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को क्या ठोस फायदा मिलेगा।

टिकैत ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग को दोहराते हुए कहा कि किसानों के लिए यह सबसे जरूरी मुद्दा है, जिसे बजट में शामिल नहीं किया गया। साथ ही किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने की उम्मीद थी, लेकिन इस दिशा में भी कोई घोषणा नहीं की गई। उनके अनुसार, यह आर्थिक सहायता किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं और घोषणाओं का वास्तविक असर जमीन पर दिखना चाहिए। केवल आंकड़ों और दावों से किसानों की समस्याएं हल नहीं होंगी। उन्होंने बजट के क्रियान्वयन को लेकर भी संदेह जताया।
शिक्षा के मुद्दे पर भी टिकैत ने चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि निजी स्कूलों को बढ़ावा देने की नीति से सरकारी स्कूलों की स्थिति कमजोर हो सकती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
















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