khabarhunt.in

खबर का शिकार

673 दिन बाद मिली रामलला प्राण प्रतिष्ठा की पूर्णता – देशभर में गूंजा दिव्य उत्सव

अयोध्या से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने पूरे देश में भक्ति और भावनाओं की लहर दौड़ा दी। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिन बाद, राम मंदिर की पूर्णता का शुभ-संकेत मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंदिर के आकाशचुंबी शिखर पर धर्मध्वज का विधिवत आरोहण किया।

जैसे ही दो किलो वजनी केसरिया ध्वजा 161 फीट ऊँचे शिखर पर लहराया— अयोध्या में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं की आंखें भावनाओं से भर उठीं और पूरा वातावरण ‘राममय’ हो गया।

समारोह में शामिल हुए प्रमुख संत और राष्ट्रीय नेतृत्व इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ—आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संत समाज
और हजारों भक्त उपस्थित रहे। अयोध्या में आज का दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि सदियों की प्रतीक्षा का प्रतीक बन गया।

इतिहास की नई तिथि—25 नवंबर
9 नवंबर 2019 से लेकर 5 अगस्त 2020 और 22 जनवरी 2024 तक की ऐतिहासिक तिथियों की श्रंखला में
अब 25 नवंबर भी स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गई है।

राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज का आरोहण—
सनातन संस्कृति की अदम्य आस्था का प्रतीक बनकर उभरा है।

यह परंपरा का सम्मान भी है और उस आध्यात्मिक ऊर्जा का स्मरण भी, जिसने पूरे विश्व को राम में एकसूत्र में बांधा।

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: “सदियों के घाव आज भर गए”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत “सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष से की।
उन्होंने कहा—

> “आज सदियों के घाव भर गए हैं। यह पाँच सौ वर्षों की साधना का फल है… संकल्प से सिद्धि का प्रतीक है… सत्यमेव जयते की विजय है।”

प्रधानमंत्री ने कारीगरों, श्रमवीरों, वास्तुकारों और राम मंदिर निर्माण से जुड़े हर योगदानकर्ता का सम्मान किया।

उन्होंने शबरी, केवट, निषादराज, अहिल्या, वाल्मीकि, अगस्त्य, वशिष्ठ, जटायु और ‘गिलहरी’ के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा—

> “बड़ा लक्ष्य छोटे-छोटे प्रयासों से ही पूरा होता है।”

धर्मध्वज आरोहण: सनातन संस्कृति की आस्था का शिखर
161 फीट ऊँचे शिखर पर लहराता केसरिया ध्वज अब केवल एक परंपरा नहीं…यह उस आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन गया है—जिसने राममंदिर आंदोलन की आत्मा को जीवित रखा।

अयोध्या में आज का यह क्षण “सदियों की तपस्या से निकला दिव्य सत्य” बनकर दर्ज हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *