हरियाणा में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिले अब धीरे-धीरे ‘गैस चैंबर’ जैसे हालात झेल रहे हैं। शनिवार को 15 जिलों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘खराब से बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।
दिनभर छाए स्मॉग और धुंध ने लोगों की सांस लेना मुश्किल कर दिया। रोहतक इस सूची में सबसे प्रदूषित जिला रहा, जहां AQI 389 दर्ज किया गया। वहीं, सिरसा की हवा सबसे स्वच्छ पाई गई, जहां AQI सिर्फ 83 रहा।
दिल्ली-एनसीआर से सटे जिले, जैसे कि भिवानी, फतेहाबाद, जींद, और पानीपत, सबसे अधिक प्रभावित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भिवानी और चरखी दादरी में चल रही माइनिंग गतिविधियों से धूलकणों की मात्रा और बढ़ रही है, जिससे हवा और जहरीली हो रही है।
हिसार में भी सुबह से शाम तक स्मॉग छाया रहा, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि स्मॉग में मौजूद प्रदूषण के महीन कण आंखों के कार्निया पर जमा होकर लालिमा और जलन पैदा करते हैं। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है।
जिला अनुसार AQI स्थिति:
रोहतक: 389
चरखी दादरी: 375
फतेहाबाद: 334
जींद: 330
कैथल:324
बल्लभगढ़:319
पानीपत: 287
यमुनानगर: 281
गुरुग्राम: 276
कुरुक्षेत्र: 276
करनाल: 251
बहादुरगढ़: 254
सोनीपत: 239
नारनौल: 215
हिसार: 206
भिवानी: 114
फरीदाबाद: 196
मानेसर: 160
पलवल: 120
पंचकूला: 196
सिरसा: 83
हरियाणा के कई जिलों की हवा अब मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। प्रदूषण से न केवल सांस लेने में तकलीफ बढ़ रही है, बल्कि आंखों और त्वचा पर भी इसका असर दिखने लगा है।
















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