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राज्य सरकार का ‘गिव अप’ अभियान: अब समृद्ध परिवारों से सामाजिक सुरक्षा पेंशन छोड़ने की अपील

राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए ‘गिव अप अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत सरकार ने उन पेंशनधारकों से अपील की है जिनकी वार्षिक आय ₹48,000 से अधिक है, कि वे स्वेच्छा से अपनी पेंशन का त्याग करें ताकि यह सुविधा वास्तव में ज़रूरतमंद और गरीब परिवारों तक पहुँच सके।

वर्तमान में प्रदेश में लगभग 92 लाख लोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ ले रहे हैं, जिस पर सरकार हर साल 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करती है। सरकार का कहना है कि समय के साथ कई लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन वे अब भी पेंशन ले रहे हैं। इसलिए ऐसे परिवारों को स्वैच्छिक रूप से योजना से बाहर आने का अनुरोध किया गया है, ताकि अधिक पात्र और वंचित व्यक्तियों को इसका लाभ दिया जा सके।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने इस संबंध में वार्षिक सत्यापन प्रक्रिया को भी सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव आशीष मोदी द्वारा 9 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार, जिला कलेक्टरों को 15 नवंबर तक सभी लंबित पेंशनधारकों के जीवन प्रमाण-पत्र (सत्यापन) पूरे करने का लक्ष्य दिया गया है।

निर्देशों में कहा गया है कि जिन पेंशनधारकों का अब तक सत्यापन नहीं हुआ है, उनका सत्यापन किसी भी हाल में 15 नवंबर तक पूरा कर लिया जाए। इसके लिए पंचायतों और शहरी वार्डों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, जहां लंबित सत्यापन के मामले अधिक हैं।

साथ ही, उन कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने को कहा गया है जिन्होंने निर्धारित समय पर सत्यापन कार्य पूरा नहीं किया है। इस अभियान की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा राज्य स्तर पर की जाएगी।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन पेंशनरों का वार्षिक बिजली बिल ₹24,000 से अधिक है, उन्हें पेंशन छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।हालांकि, किसी भी लाभार्थी की पेंशन रोकने से पहले सूक्ष्म जांच और व्यक्तिगत सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी पात्र व्यक्ति को बिना कारण वंचित न किया जाए।

राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल न केवल समानता और पारदर्शिता की दिशा में कदम है, बल्कि इससे उन हजारों जरूरतमंद परिवारों को भी राहत मिलेगी जो अब तक पात्रता के बावजूद योजना से वंचित हैं।

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