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पूर्व CJI गवई की अनोखी मिसाल: जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें CJI, शपथ समारोह में पहली बार इतने देशों के मुख्य न्यायाधीश शामिल

देश के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने आज राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह की सबसे खास बात यह रही कि जस्टिस सूर्यकांत ने हिंदी में शपथ ली। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।

पूर्व CJI बी.आर. गवई ने किया अनोखा और प्रेरक काम

शपथ ग्रहण के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने एक ऐसी मिसाल पेश की, जो भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में शायद ही पहले देखी गई हो। उन्होंने अपने पद से रिटायर होने के बाद अपनी आधिकारिक कार नए CJI सूर्यकांत के लिए राष्ट्रपति भवन में ही छोड़ दी, ताकि नए मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट रवाना हो सकें और उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। एएनआई के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी निवर्तमान CJI ने अपनी आधिकारिक कार का उपयोग न करके इसे सम्मान के रूप में अपने उत्तराधिकारी के लिए छोड़ दिया।

ऐतिहासिक बन गया शपथ ग्रहण समारोह

जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खास माना गया, क्योंकि इस बार भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के छह देशों के मुख्य न्यायाधीश** और सुप्रीम कोर्ट के जज इस कार्यक्रम में शामिल हुए। किसी भारतीय CJI के शपथ समारोह में इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक उपस्थिति पहली बार देखने को मिली।

गांधी जी को दी श्रद्धांजलि

शपथ ग्रहण के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में स्थित **महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण** कर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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