नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर श्रेणी में बनी हुई है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ग्रेप-3 (GRAP-3) नियमों के बावजूद कई इलाकों में खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। निर्माण कार्य जारी हैं, सड़कों पर कूड़ा और लकड़ी जलाई जा रही है, जबकि संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करने में नाकाम दिख रही हैं।
दैनिक जागरण की टीम द्वारा की गई जमीनी जांच में सामने आया कि करोल बाग, दक्षिणी दिल्ली, बाहरी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली जैसे क्षेत्रों में ग्रेप के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। करोल बाग में जगह-जगह निर्माण कार्य जारी हैं, जबकि सड़कों के किनारे कूड़ा जलने से धुआं फैल रहा है।
दक्षिणी और बाहरी दिल्ली में टूटी सड़कों और खुले में पड़े मलबे के कारण धूल उड़ रही है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ रहा है। वहीं पूर्वी दिल्ली में लकड़ी और ठोस कचरे को जलाने की घटनाएं वायु गुणवत्ता को और खराब कर रही हैं।
ग्रेप (Graded Response Action Plan) के तहत निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध, कूड़ा जलाने पर रोक, और सड़क की नियमित सफाई जैसे सख्त निर्देश हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन नहीं किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंसियों की लापरवाही और सख्त निगरानी की कमी के कारण प्रदूषण नियंत्रण उपाय बेअसर साबित हो रहे हैं। अगर स्थिति यही रही, तो अगले कुछ दिनों में वायु गुणवत्ता “गंभीरतम श्रेणी” में पहुंच सकती है।













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