जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एसएमएस में प्रशासनिक लापरवाही के कारण बड़ा हादसा हुआ। रविवार देर रात ट्रॉमा सेंटर के ICU में अचानक आग लग गई, जिससे 8 मरीजों की मौत हो गई और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हैं। आग लगते ही पूरे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। देर रात मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मौके पर पहुंचे और जांच के लिए कमेटी बनाने के आदेश दिए।
वो 8 बड़ी लापरवाहियां जिनसे गई 8 जानें:
चिंगारी को नज़रअंदाज़ करना – ICU के पास स्टोर रूम में शॉर्ट सर्किट से चिंगारी उठी, लेकिन स्टाफ ने मरीजों की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।
स्टाफ का भाग जाना – आग और धुएं के फैलते ही अस्पताल कर्मचारी मरीजों को छोड़कर अपनी जान बचाने में लग गए।
मददगारों को रोका गया – बाहर से मदद करने पहुंचे लोगों को गार्ड्स ने अंदर नहीं जाने दिया, जिससे बचाव कार्य में देरी हुई।
20 मिनट तक कोई एक्शन नहीं – सूचना देने के बावजूद लंबे समय तक कोई कदम नहीं उठाया गया, यहां तक कि पाइप पिघलकर गिरने लगे।
मरीजों को मदद नहीं मिली – परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने मरीजों को बचाने की कोई कोशिश नहीं की।
सवा घंटे बाद पहुंची स्नार्कल लैडर – ऊपरी मंजिल पर लगी आग पर काबू पाने वाली विशेष मशीन समय पर नहीं पहुंच सकी।
फायर टेंडर अंदर नहीं घुस पाए – ट्रॉमा सेंटर का गेट छोटा होने के कारण स्नार्कल लैडर परिसर में प्रवेश ही नहीं कर पाई।
फायर सेफ्टी इंतज़ाम नाकाफी – ICU और ट्रॉमा सेंटर में आग बुझाने के पर्याप्त साधन नहीं थे, जिससे आग तेजी से फैल गई।
यह हादसा साफ दिखाता है कि अगर समय पर कदम उठाए जाते और फायर सेफ्टी सिस्टम दुरुस्त होते, तो 8 जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।















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