
रविवार को दिल्ली के एक होटल में ‘दिल्ली ऑस्टियोपोरोसिस कोर्स 2025’ के दूसरे संस्करण का आयोजन किया गया जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आये 300 से भी ज्यादा ऑर्थोपैडिक सर्जन ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के आयोजक एवं गवार्निंग डायरेक्टर, डॉक्टर राजीव जैन ने बताया कि इस कार्यक्रम के जरिये डॉक्टरों को ऑस्टियोपोरोसिस की रोकथाम सम्बन्धी नवीनतम जानकारियां साझा की जाती हैं। उन्हें इलाज की नई तकनीकों और दवाइयों के साथ ही अन्य अनुभवी डॉक्टरों ने किस तरह जटिल मामलों का इलाज किया उन अनुभवों को भी साझा किया जाता है। चूंकि यह जानकारियों और सूचनाओं को बांटने का मंच बन जाता है इसीलिए हमने इस कार्यक्रम को ऑस्टियोपोरोसिस कोर्स का नाम देना ज्यादा उचित समझा।
वहीं कार्यक्रम के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन एवं ऑर्थोपैडिक सर्जन डॉक्टर एल तोमर ने बताया, ‘ईस्ट दिल्ली ऑर्थोपैडिक एसोसिएशन द्वारा आयोजित किये जाने वाले इस कोर्स को हमने हर वर्ष कराने का निर्णय किया है क्योंकि ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी समस्या है जिसमें हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जिससे उनके कमजोर होकर टूटने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसके अलावा ऐसी महिलाएं जिनका मेनोपॉज हो गया हो उनकी भी ऑस्टियोपोरोसिस की चपेट में आने की ज्यादा सम्भावना होती है।’ डॉक्टर तोमर ने आगे कहा, ‘ऑस्टियोपोरोसिस का सामना करने वाले रोगियों को लगने वाली मामूली चोट उनकी हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकती है ऐसे में इस कार्यक्रम के माध्यम से यह भी बताते हैं की इसके रोगी अपने घरों में बालकनी, टॉयलेट, बाथरूम जाने वाले रास्तों में पॉट, करपेट, तार वगैरह ना रखें जिससे कि उनके इसमें पैर फंसने से गिरने कि आशंका बने।
कार्यक्रम में शामिल एक अन्य डॉक्टर ने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस के लिये पारिवारिक इतिहास, कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी भी जिम्मेदार होता है। हालांकि, पोषक भोजन, नियमित दिनचर्या, नशीले पदार्थो से दूरी और उचित इलाज से इसका खतरा टाला जा सकता है।













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