चंडीगढ़ में शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात कर औपचारिक रूप से त्यागपत्र सौंपा। इस्तीफे से पहले कैप्टन ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात की थी और हाल के महीनों में लगातार हुए “अपमान” को लेकर अपनी नाराज़गी भी जताई थी।
इस्तीफा देने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने साफ कहा कि उनकी भविष्य की राजनीतिक राह अब पूरी तरह खुली है और वे अपने लोगों से चर्चा के बाद अगला कदम तय करेंगे। इस मौके पर उनकी पत्नी और सांसद परनीत कौर के साथ उनके करीबी अधिकारी और परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।
कैप्टन के इस्तीफे के तुरंत बाद उनके मुख्य प्रधान सचिव सुरेश कुमार, एडवोकेट जनरल अतुल नंदा और मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने भी अपने पद छोड़ दिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैप्टन अमरिंदर ने कांग्रेस हाईकमान पर कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी जिसे चाहें मुख्यमंत्री बना सकती हैं। कैप्टन ने बताया कि उन्होंने सुबह ही सोनिया गांधी को अपने इस्तीफे के फैसले की जानकारी दे दी थी और कांग्रेस नेतृत्व के व्यवहार से वे खुद को बार-बार अपमानित महसूस कर रहे थे।
अमरिंदर सिंह ने बयान जारी करते हुए कहा कि वह अभी कांग्रेस में हैं, लेकिन राजनीतिक विकल्प हमेशा खुले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों में कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें तीन बार अपमानित किया—दो बार विधायकों को दिल्ली बुलाकर और तीसरी बार उनके बिना जानकारी के चंडीगढ़ में विधायक दल की बैठक बुलाकर।
कैप्टन ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान को जिस पर भरोसा है, उसे नया मुख्यमंत्री बना देना चाहिए।
पंजाब में बीते कुछ समय से कांग्रेस में आंतरिक कलह चल रही थी। 40 विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित चिठ्ठी से शुरू हुआ विवाद अंततः कैप्टन की कुर्सी जाने का कारण बन गया। विधायकों की अचानक बुलाई गई बैठक ने साफ कर दिया कि अब अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री पद पर लंबे समय तक नहीं रह पाएंगे—और आखिरकार यही हुआ।
















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